Mar 21, 2008

होलिफ़ लैला

देखिये, होली में जो देस में हैं सब हल्के हो रहे हैं, आप सब को शुभ कामनाएं, हम तो अरब देश में पड़े हैं, और होली में काम पर जा रहे हैं, आप कुछ गुझिया हमारे लोगों के नाम की भी खा लीजियेगा और ... [ बाकी आप सब विद्वान् हैं ]

तो जो होली में हमारे जैसे काम पर जा रहे हैं उनका एक होली गीत -

राजा ने रानी की, सुननी सुनानी है
जोतों को रातों को, कहनी कहानी है

जब भोर हो, ताज़ा-ताज़ा तमाशे हों
कुछ कर जुटे, कहके जोशे जवानी है

जितनी उम्मीदों से, सपने बनाये हैं
उतनी बनाने में, मेहनत लगानी है

बातें बनाने से, मौसम बदलते हैं?
मौसम बदलने की, बातें बनानी हैं

अब ये मोहर्रम के, दिन तो नहीं हैं
रंग के इरादों को, होली मनानी है


पुनश्च :

बूटी ने बम-बम की,तबियत को खोला है
जिन्नों को बोतल में, वापस घुसानी है [ :-)]
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