Apr 18, 2008

साधारण का साधारण गीत

फुटकर-चिल्लर के बाजीगर, गाजा-बाजा गाते आना।
योजन भर के अरमानों में, संक्षिप्त रूप से बह जाना।

ज्यों द्वेष नहीं कर पाते हो,
उपदेश सहज कर लाते हो।
चित तेज धार पर जाते हो,
पट मंथर- मंथर आते हो ।

ऐसे करतब दिखलाने में,
नट, खट से झट कर जाने में,
सब सही नहीं करना साथी ,
कुछ भूल चूक छापे लाना ।

फुटकर-चिल्लर के बाजीगर, गाजा-बाजा गाते आना।
लेनी देनी की भूल चाल, गुन सब के बहलाते जाना ।

है समय आज का विषम विकट,
रफ़्तार बाँटती डांट डपट।
चेहरे आश्वासन लपट लिपट,
अंदाज़ नहीं क्या कलुष कपट ।

तुम कारीगर के हाथों को ,
औ छिन्न-भिन्न मधु खातों को ,
सहला बस देना एक बार,
मरहम की पुड़िया धर जाना ।

फुटकर-चिल्लर के बाजीगर, गाजा-बाजा गाते आना।
मातम को हुश हड़का देना, खुश बंद द्वार को दे आना

जो बड़े रहें बढ़ते जाएँ,
जो खड़े रहें चढ़ते जाएँ।
जो अड़े रहें भिड़ते जाएँ,
जो पड़े रहें, सहते जाएँ।

ऐसा रहता ही होता है,
बादल को पानी बोता है,
तुम झूम-धूम को सरस-बरस,
थोड़ा सा पानी दे जाना ।

फुटकर-चिल्लर के बाजीगर, गाजा-बाजा गाते आना।
पुन लाज सजा कर मौसम की, फक्कड़ झंडे भी से आना ।
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