Dec 14, 2007

बैनीआहपीनाला - एक नहीं दो दो

[ बचपन में इन्द्रधनुष के रंग रटने का यही फार्मूला होता था - जब तक अंग्रेजी माध्यम नहीं शुरू किया था ]

बैरंग चिट्ठी के कमज़ोर टिकट,

नी की टहनी के बगल बनफूल गए।
हट टटोलते, सरपट में बोलते,
ठीले, पिनकते, बाँहों में झूल गए।
पी-पीस घोंटें, बहानों की चाशनी,
ना-नुकुर के कामों को, मांगों में भूल गए।
लाले लफंदर, छुटके खेलें गुडिया, जब बड़के स्कूल गए।


(किसलय -१० और कार्तिक - ३ के लिए )
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